अग्रिम कार्रवाई के माध्यम से सामुदायिक क्षमता को मजबूत करने के लिए हिमाचल प्रदेश में राज्य-स्तरीय परामर्श का आयोजन

आपदा पूर्व तैयारी को लेकर सरकार, समुदाय और संस्थाओं का साझा मंच

पहली खबर ब्यूरो 

शिमला। हिमाचल प्रदेश में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता को देखते हुए, आपदा से पहले की तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को सशक्त करने के लिए आज शिमला में एक राज्य-स्तरीय परामर्श का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का शीर्षक था—“अग्रिम कार्रवाई के माध्यम से सामुदायिक क्षमता को मजबूत करना: हिमाचल प्रदेश में सतत विकास के लिए एक रोडमैप”

इस परामर्श का आयोजन एडीआरए इंडिया द्वारा, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और एडीआरए जर्मनी के सहयोग से किया गया। संगोष्ठी में प्रमुख सरकारी एजेंसियों, गैर सरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न जिलों से आए पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

यह कार्यक्रम ADRA द्वारा चलाए जा रहे “आपदा पूर्व तैयारी और प्रारंभिक रिकवरी सहायता” परियोजना का हिस्सा है। 2023 के विनाशकारी मानसून के बाद राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, अग्रिम कार्रवाई और पुनर्प्राप्ति क्षमता बढ़ाने की दिशा में यह प्रयास तेज़ हुआ है।

कार्यक्रम का उद्देश्य परियोजना से प्राप्त सीख को साझा करना, विभिन्न क्षेत्रों के बीच संवाद स्थापित करना, तथा DRR को राज्य की विकास योजनाओं में एकीकृत करना रहा।

NDMA के सदस्य कृष्णा वस्ता ने उद्घाटन भाषण में ग्राम स्तर पर आपदा प्रबंधन की योजनाओं को स्थानीय विकास योजना में सम्मिलित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि NDMA भी अग्रिम कार्रवाई पर केंद्रित कार्य कर रहा है और आजीविका की रक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

ADRA इंडिया के कंट्री डायरेक्टर संतोष श्रीकांत ने कहा, “समय पर दी गई सहायता, समन्वय और समुदाय की भागीदारी से ही लचीला हिमाचल बन सकता है। यह संगोष्ठी ज्ञान को व्यवहार में बदलने का अवसर है।”

कार्यक्रम में दो पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं— पहली में “Anticipatory Action” और दूसरी में “सतत विकास और लचीलापन” पर चर्चा की गई।
वक्ता पैनल में प्रकाश ठाकुर (ADRA Germany), रोहन जैन (ADRA India), श्रेया वाधवा (CEEW), अमित टुटेजा (NDMA), विजय सिंह (DDMA, Solan), अनुराधा भरद्वाज (DOERS), शोभित कटियार (IMD), डॉ. अदिति सिंह (Miyamoto International) और प्रो. देवदत्त शर्मा (HPU) से शामिल रहें।

ADRA इंडिया के प्रोग्राम डायरेक्टर इमरान माजिद ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण भूस्खलन, फ्लैश फ्लड्स और GLOFs जैसी आपदाओं की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में पूर्व चेतावनी प्रणाली और सामुदायिक लचीलापन अत्यंत आवश्यक हो गया है।

विभिन्न गांवों से आए पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्राम स्तर पर की गई तैयारियों, प्रशिक्षणों, और स्थानीय समस्याओं व समाधानों को साझा किया। सोलन से आयी शिक्षिका कल्पना पाठक ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सुधारने की दिशा में ADRA के सहयोग से किए गए प्रयासों की जानकारी दी।

यह परामर्श बैठक, राज्य में आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाने, संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, और समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा।

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