वित्त वर्ष 2026 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद : शिवराज चौहान

The growth rate of the agriculture sector is expected to reach 3.5 percent in the financial year 2026: Shivraj Chauhan

नई दिल्ली, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि देश में वित्‍त वर्ष 2025-26 के दौरान कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5 फीसदी तक पहुंचने की उम्‍मीद है। उन्होंने आगामी खरीफ बुवाई से पहले किसानों को नई प्रौद्योगिकियों के बारे में शिक्षित करने के लिए 15 दिवसीय अखिल भारतीय अभियान की घोषणा की।कृषि‍ मंत्री चौहान आज नई दिल्‍ली में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कृषि क्षेत्र में 1.5-2 फीसदी की वृद्धि दर को अच्छा माना जाता है। भारत कम से कम 3 से 3.5 फीसदी की वृद्धि दर हासिल कर रहा है। हमें अगले साल यानी वित्त वर्ष 2025-26 में भी 3-3.5 फीसदी की वृद्धि हासिल करने की उम्मीद है।चौहान ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.8 फीसदी आंकी गई है। उन्‍होंने कहा क‍ि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लगभग आधी आबादी के रोजगार का साधन और आजीविका है। देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है। हमारा सपना और संकल्प है कि एक दिन भारत को फूड बास्केट ऑफ वर्ल्ड बनाना है। इसलिए हमने तय किया है कि खरीफ की फसल के लिए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ चलाएंगे।इससे पहले केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन से वर्चुअल माध्यम से राज्यों के कृषि मंत्रियों से बातचीत की। उन्‍होंने आगामी ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ को सफल बनाने का आह्वान किया। चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों को 29 मई से 12 जून तक चलने वाले इस देशव्यापी अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने और अधिक से अधिक किसानों तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से काम करने की बात कही।राज्यों के कृषि मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों से 29 मई से 12 जून तक चलने वाले राष्ट्र व्यापी ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री ने नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में सिंधु जल संधि के संबंध में ऐतिहासिक निर्णय पर किसानों से संवाद किया। इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ एक रचनात्मक अभियान है। चौहान ने बताया कि इसमें किसान और विज्ञान दोनों जुड़ेंगे। देशभर के 65 हजार से अधिक गांवों में वैज्ञानिक किसानों से सीधा संवाद करेंगे। देश के 723 जिलों में संचालित इस अभियान के माध्यम से 1.30 करोड़ से अधिक किसानों के साथ सीधा संवाद किया जाएगा।

 

 

 

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