रास में विपक्षी सदस्यों ने विमानों के किराये पर नियंत्रण के लिए की नियामक बनाने की मांग

Opposition members in the Rajya Sabha demanded the creation of a regulator to control airfares

नई दिल्ली,विमानों का किराया अधिक होने पर चिंता जताते हुए बृहस्पतिवार को राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने इसके नियमन के लिए नियामक गठित किए जाने की मांग की वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि सरकार की नीतियों की बदौलत ही देश आज दुनिया में विमानन क्षेत्र में तीसरे स्थान पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।राज्यसभा में भारतीय वायुयान विधेयक 2024 पर चर्चा में भाग लेते हुए आईयूएमएल सदस्य हारिस बीरन ने विमानों का किराया अधिक होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एक नियामक होना चाहिए जो किराये पर नजर रखे और उसे नियंत्रित करे। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में विमानन कंपनियां गलत फायदा उठाती हैं।उन्होंने कहा कि विमान यात्रा के दौरान दुर्व्यवहार करने वाले यात्रियों की समस्या बढ़ती जा रही है जिस पर नियंत्रण के लिए उपाय किए जाने चाहिए, केवल निषिद्ध सूची में उन्हें शामिल करना पर्याप्त नहीं है।भारतीय जनता पार्टी की गीता उर्फ चंद्रप्रभा ने कहा कि हवाई सेवा में विस्तार के कारण हवाई क्षेत्र में हादसों की आशंका बढ़ी है। उन्होंने कहा कि नए विधेयक का उद्देश्य किसी भी हवाई दुर्घटना या घटना की जांच के लिए सरकार को नियम बनाने का अधिकार देना है।माकपा के एए रहीम ने कहा कि भारत भाषायी विविधता वाला देश है फिर भी इस विधेयक का नाम ‘भारतीय वायुयान विधयेक, 2024’ रखा गया। ‘‘ऐसा क्यों ? सरकार ऐसा नाम रख सकती थी जो सबको स्वीकार्य हो।’’उन्होंने कहा कि विमानन क्षेत्र पर सरकार का नहीं बल्कि तीन कंपनियों का एकाधिकार है और ऐसे में सामान्य लोगों के लिए किसी राहत की उम्मीद ही जा सकती है। ‘‘यहां तक कि सरकार भी अपनी नीतियां तीनों कंपनियों को ध्यान में रख कर बनाती है।’’भाजपा के डॉ परमार जसवंतसिंह सालमसिंह ने कहा कि सरकार की आलोचना करने से पहले, उसके सकारात्मक कदमों को देखना चाहिए। उन्होंने कहा ‘‘सरकार की नीतियों की बदौलत ही देश आज दुनिया में विमानन क्षेत्र में तीसरे स्थान पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।’’इसी पार्टी के रामचंद्र जांगड़ा ने कहा ‘‘हमारा यह दुर्भाग्य है कि हम अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हो गए लेकिन अंग्रेजी की गुलामी से मुक्त नहीं हो पाए। हिंदी देश का गौरव है, यह केवल मातृभाषा ही नहीं है। हिंदी हमारी आत्मा है, हमें इससे प्रेम करना चाहिए।’’उन्होंने कहा कि नया विधेयक वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार जरूरतों को ध्यान में रख कर लाया गया है।

शिवसेना (उबाठा) की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि लोकलुभावनी तस्वीर की असलियत है कि दो एयरलाइनों का विमानन क्षेत्र में वर्चस्व है इसीलिए किराये में लोगों को राहत नहीं मिलती।उन्होंने कहा कि सरकार एयरलाइनों के जो रूट तय करती है उनमें से कई को बाद में छोड़ दिया जाता है। ‘‘जाहिर है कि इन रूट के बंद होने के बाद वहां के हवाईअड्डे भी काम नहीं करते।’’उन्होंने कहा कि यह विधेयक बहुत अच्छा बन सकता था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव ने कहा कि सरकार का जोर निजीकरण पर है इसलिए उससे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह विमान के किराये से लेकर अन्य मुद्दों को देखेगी।चर्चा में भाजपा के मिशन रंजन दास और अजीत माधवराव गोपचड़े ने भी हिस्सा लिया।

 

 

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