‘बिजली मित्र’ पर आपत्ति अनुचित: धर्माणी ने याद दिलाए भाजपा शासन के फैसले

बोले, पूर्व सरकार ने ‘कृषि मित्र’ व ‘पशु सखियों’ की नियुक्तियां कीं, अब युवाओं को गुमराह कर रहे हैं जय राम ठाकुर

 

पूर्व सरकार ने ‘कृषि मित्र’ व ‘पशु सखियों’ की नियुक्तियां कीं, अब युवाओं को गुमराह कर रहे हैं जय राम ठाकु

 

पहली खबर ब्यूरो

शिमला। कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर द्वारा ‘बिजली मित्र’ योजना पर की गई टिप्पणी को पूरी तरह अप्रासंगिक करार दिया है। शिमला से जारी बयान में उन्होंने कहा कि यह वही भाजपा है, जिसने अपने कार्यकाल में सबसे पहले ‘कृषि मित्रों’ और बाद में ‘पशु सखियों’ की नियुक्तियां शुरू की थीं। उस समय नियुक्त किए गए कृषि मित्रों ने पूरे कार्यकाल में अनियमित और बेहद कम मानदेय को लेकर लगातार आवाज़ उठाई थी।

धर्माणी ने कहा कि मौजूदा सरकार द्वारा शुरू की गई ‘बिजली मित्र’ पहल स्पष्ट नीति और नियमित मानदेय के साथ लाई गई है। वर्तमान सरकार 10वीं पास तथा आईटीआई ट्रेड (इलेक्ट्रीशियन/वायरमैन) में प्रशिक्षित युवाओं को छह घंटे ड्यूटी के लिए 10,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय देगी और वार्षिक वृद्धि का प्रावधान भी होगा। प्रदेश में 1,602 बिजली उपभोक्ता मित्र रखने की योजना है। इसके विपरीत, भाजपा सरकार ‘कृषि मित्र’ नियुक्तियों के लिए कोई समान शैक्षणिक योग्यता या नियमन तय नहीं कर पाई थी।

उन्होंने जय राम ठाकुर को केंद्र की अग्निवीर नीति की भी याद दिलाई, जिसके तहत युवाओं को मात्र चार वर्ष की सेवा के बाद बिना किसी नौकरी सुरक्षा या पेंशन लाभ के वापस भेज दिया जाता है। मंत्री ने कहा कि भाजपा ने अपने शासनकाल में प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया और आज वही युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।

धर्माणी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने शिक्षा, जल शक्ति और लोक निर्माण विभाग में मात्र 4,500 रुपये मानदेय पर मल्टी–टास्क वर्कर्स नियुक्त किए, जिनका मानदेय मौजूदा सरकार ने 1,000 रुपये बढ़ाया। उन्होंने याद दिलाया कि हमीरपुर कर्मचारी चयन आयोग में नौकरियों की खुलेआम बिक्री और व्यापक भ्रष्टाचार भाजपा शासन की ही देन था।

मंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता को मीडिया में अप्रासंगिक मुद्दे उठाने के बजाय अपने कार्यकाल की कमियों पर भी विचार करना चाहिए और प्रदेश हित में सरकार द्वारा लिए जा रहे सकारात्मक निर्णयों की सराहना करनी चाहिए।

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