हिमाचल बजट 2025-26: वित्तीय संकट के बीच मुख्यमंत्री ने पेश किया अपना तीसरा बजट
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं पर जोर, लेकिन वित्तीय संतुलन बना चुनौती

शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में ₹58,514 करोड़ का बजट पेश किया। सरकार ने इसे विकासोन्मुखी और कल्याणकारी बताया, जबकि विपक्ष ने इसे दिशाहीन और हकीकत से परे करार दिया। इस बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, दुग्ध उत्पादन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, पर्यटन के विस्तार और महिला तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए नई योजनाओं का ऐलान किया गया। हालांकि, राज्य की गंभीर वित्तीय स्थिति और ₹1.04 लाख करोड़ से अधिक के कर्ज को देखते हुए विपक्ष ने इसे चुनावी बजट करार दिया और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
ग्रामीण विकास को प्राथमिकता, लेकिन वित्तीय संकट बड़ा सवाल
बजट में सरकार ने दुग्ध उत्पादकों को समर्थन मूल्य बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने और किसानों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम राज्य के लाखों किसानों और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाएगा।
दुग्ध उत्पादकों को राहत: गाय के दूध का समर्थन मूल्य ₹45 से बढ़ाकर ₹51 प्रति लीटर, जबकि भैंस के दूध का ₹55 से ₹61 प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा, ₹2 प्रति लीटर की परिवहन सब्सिडी देने की घोषणा की गई है। यह कदम राज्य के 2.5 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को राहत देगा। हालांकि, सवाल यह है कि सरकार की मौजूदा वित्तीय स्थिति में यह अनुदान कितने समय तक दिया जा सकेगा। साथ ही, दूध की कीमतें बढ़ने से उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है।
प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन: सरकार ने अगले साल 1 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, हल्दी उत्पादकों को ₹90 प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य दिया जाएगा। कृषि क्षेत्र में ऑर्गेनिक उत्पादों को बढ़ावा देने और बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। लेकिन हिमाचल में छोटे किसानों की संख्या अधिक है और उनके पास सीमित भूमि है, जिससे यह योजना तभी सफल होगी जब सरकार आधुनिक तकनीक और विपणन सुविधाएँ भी उपलब्ध कराए।
पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाएँ, लेकिन बुनियादी ढांचे की जरूरत
हिमाचल की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का अहम योगदान है और सरकार ने इसे बढ़ावा देने के लिए कई घोषणाएँ की हैं। मुख्यमंत्री ने पर्यटन स्टार्टअप योजना के तहत युवाओं को स्वरोजगार के अवसर देने की बात कही। इसके अलावा, चाय बागानों को ईको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने और 500 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की योजना बनाई गई है।
सरकार ने शिमला रोपवे परियोजना शुरू करने की घोषणा की, जिससे राजधानी में ट्रैफिक समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। लेकिन पर्यटन क्षेत्र को वास्तविक रूप से बढ़ावा देने के लिए सड़क, बिजली, पानी और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करना जरूरी है।
महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए नई योजनाएँ
महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार ने 21 वर्ष की आयु पूरी करने वाली लड़कियों को ₹1,500 प्रति माह की सहायता देने की घोषणा की है। इससे प्रदेश की हजारों लड़कियों को आर्थिक संबल मिलेगा।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों की विशेष देखभाल योजना शुरू करने का ऐलान किया गया है। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि सरकार की वित्तीय स्थिति को देखते हुए इन योजनाओं का लंबे समय तक टिके रहना मुश्किल है।
विपक्ष के आरोप और सरकार का बचाव
मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने बजट को जनहितैषी बताया और कहा कि उनकी सरकार वित्तीय प्रबंधन को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बिना नए कर लगाए राजस्व बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे और केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक पैकेज की भी माँग की गई है।
वहीं, विपक्ष ने बजट को खोखले वादों का पुलिंदा बताया। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की घोषणाएँ हकीकत से कोसों दूर हैं और जब तक वित्तीय संकट का समाधान नहीं किया जाता, तब तक कोई भी योजना सफल नहीं हो सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ चुनावी घोषणाएँ कर रही है, लेकिन वित्तीय स्रोतों पर कोई स्पष्ट नीति नहीं है।
वित्तीय संतुलन की बड़ी चुनौती
हिमाचल प्रदेश का कुल कर्ज ₹1.04 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है और सरकार को अगले कुछ वर्षों में इसे कम करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। इस बजट में सरकार ने कोई नया कर नहीं लगाया है, जिससे यह सवाल उठता है कि राजस्व घाटे की भरपाई कैसे होगी?
अगर सरकार नए कर्ज लेकर योजनाओं को लागू करती है, तो यह राज्य की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल सरकार को बजट संतुलन बनाने और राजस्व बढ़ाने पर ध्यान देना होगा, अन्यथा यह बजट भी सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रह जाएगा।
विकास बनाम वित्तीय संकट
मुख्यमंत्री सुक्खू का यह तीसरा बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, पर्यटन और कल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित है। सरकार ने कई लोकलुभावन घोषणाएँ की हैं, लेकिन हिमाचल की गंभीर वित्तीय स्थिति को देखते हुए इन योजनाओं को लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी।
अगर सरकार राजस्व बढ़ाने के नए साधन नहीं खोजती और कर्ज पर निर्भर रहती है, तो हिमाचल का आर्थिक संकट और गहरा सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार अपनी घोषणाओं को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाती है।




