भारत तीन प्रकार के छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित कर रहा : जितेंद्र सिंह

India is developing three types of small modular reactors: Jitendra Singh

नई दिल्ली, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि भारत तीन प्रकार के छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) विकसित कर रहा है, जिनमें से एक रिएक्टर विशेष रूप से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए होगा। डॉ.सिंह ने कहा कि इनमें 200 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर-200), 55 मेगावाट क्षमता वाला एसएमआर, और पांच मेगावाट थर्मल उच्च तापमान गैस कूल्ड रिएक्टर (जीसीआर) शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पांच मेगावाट वाले को विशेष रूप से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए डिजाइन किया गया है। डॉ. सिंह ने कहा कि इन रिएक्टरों के निर्माण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी प्राप्त हो चुकी है।परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के 60 से 72 महीनों के भीतर इनका निर्माण शुरू किया जाएगा। डॉ. सिंह ने कहा कि इन संयंत्रों के लिए आवश्यक तकनीक देश में उपलब्ध है। वर्तमान में भारत में कुल 25 परमाणु रिएक्टर हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 8,880 मेगावाट है। इसमें राजस्थान के रावतभाटा स्थित आरएपीएस-1 (100 मेगावाट) शामिल है, जो लंबे समय से बंद है। 30 दिनों का ले सकते हैं अवकाश डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सेवा नियमों के तहत 30 दिनों का अर्जित अवकाश मिलता है, जिसे वे वृद्ध माता-पिता की देखभाल सहित व्यक्तिगत कारणों के लिए ले सकते हैं। उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। गगनयान की तैयारियां प्रगति पर भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान वर्ष 2027 की पहली तिमाही में प्रक्षेपित किया जाएगा और इसके लिए आवश्यक अवसंरचना जैसे ऑर्बिटल मॉड्यूल प्रिपरेशन फैसिलिटी, गगनयान कंट्रोल सेंटर, क्रू प्रशिक्षण सुविधा और लॉन्च पैड में आवश्यक संशोधन पूरे कर लिए गए हैं। राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि गगनयान कार्यक्रम के तहत ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल (एचएलवीएम3) का विकास और ग्राउंड परीक्षण पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही प्रीकर्सर मिशन के तहत टेस्ट व्हीकल (टीवी-डी1) के माध्यम से क्रू एस्केप सिस्टम का परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया है। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्रमा पर मानव मिशन के बारे में बताया कि गगनयान कार्यक्रम भारत को एक पूर्ण अंतरिक्ष कौशल संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके बाद अगला लक्ष्य पृथ्वी की निचली कक्षा में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना करना है, ताकि दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष मिशन संभव हो सके।

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