ब्लास्ट से 2 साल पहले साध्वी बनीं प्रज्ञा, धमाके वाली बाइक से कोई संबंध नहीं: एनआईए कोर्ट
Pragya became a Sadhvi 2 years before the blast, has no connection with the bike that carried the blast: NIA Court

नई दिल्ली,17 साल और 300 के ऊपर गवाहों के बाद आज एनआईए की विशेष अदालत ने मालेगांव ब्लास्ट तेस पर अपना फैसला सुना दिया। इस घटना से जुड़े सातों आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है। इनमें पूर्व बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर का भी नाम है जिनपर आरोप था कि उन्होंने हादसे वाली जगह जिस बाइक में धमाका हुआ था,वही इन्होंने ही मुहैया कराई थी। आज की सुनवाई में कोर्ट ने इसे सही नहीं माना है। कोर्ट का कहना है कि प्रज्ञा ठाकुर का ब्लास्ट वाली बाइक से कोई लिंक नहीं है और वह तो धमाके के दो साल पहले ही साध्वी हो गई थीं।मुंबई की विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश ए.के. लाहोटी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रज्ञा ठाकुर धमाके से दो साल पहले ही साध्वी बन चुकी थीं। जज ने यह भी कहा कि वह भौतिक चीजों से दूर हो चुकी थीं। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, जज लाहोटी ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि बम उस खास मोटरसाइकिल में रखा गया था। अदालत ने आगे कहा, “धमाके में कथित तौर पर शामिल बाइक का चेसिस नंबर साफ नहीं था। अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि धमाके से ठीक पहले वह प्रज्ञा ठाकुर के पास थी।” बता दें कि 2008 में मालेगांव बम धमाके के बाद प्रज्ञा ठाकुर पर आरोप लगा था कि मोटरसाइकिल उनके नाम पर रजिस्टर्ड थी। इसे पूरे मामले की अहम कड़ी के रूप में पेश किया गया था।मालेगांव धमाके में बरी होने के बाद प्रज्ञा ठाकुर ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “मैंने यह शुरू से ही कहा था कि जिन्हें जांच के लिए बुलाया जाता है। उसके पीछे कोई आधार होना चाहिए। मुझे जांच के लिए बुलाया गया और गिरफ्तार कर यातना दी गई। इसने मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी।” उन्होंने आगे कहा, “मैं एक साधु का जीवन जी रही थी, लेकिन मुझे आरोपी बना दिया गया। मैं जिंदा हूं क्योंकि मैं एक संन्यासिनी हूं।” उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन पर आरोप लगाए, उन्होंने “एक साजिश के तहत भगवा (केसरिया) को बदनाम किया।” प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, “आज भगवा जीत गया है और हिंदुत्व जीत गया है।”




