महंगाई, बेरोजगारी से लोग परेशान, ट्रम्प के टैरिफ लगाने का होगा नकारात्मक असर: विपक्ष
People are troubled by inflation and unemployment, Trump's imposition of tariffs will have negative impact: Opposition

नई दिल्ली, विपक्षी सदस्यों विशेषकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रविड मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के सदस्यों ने वित्त वर्ष 2025-26 के आम बजट की कड़ी आलोचना करते हुये गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि इसमें बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से निपटने के लिए काेई उपाय नहीं किये गये हैं और राज्यों के साथ भेदभाव किया गया है तथा अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाये जाने को देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।कांग्रेस सदस्य एवं पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने विनियोग (संख्यांक तीन) विधेयक 2025 और वित्त विधेयक 2025 पर सदन में चर्चा की शुरूआत करते हुये कहा कि बजट करीब आठ सप्ताह पहले पेश किया गया लेकिन इसपर कहीं कोई चर्चा नहीं हो रही है। उन्होंने कहा. “मैं जहां भी जाता हूं, जहां भी बोलता हूं, कोई भी बजट को याद नहीं रखता, कोई भी इस पर चर्चा नहीं करता।”उन्होंने मोदी सरकार की राजकोषीय नीति को सराहनायोग्य बताते हुये कहा कि केंद्र सरकार के ऋण को सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में कम करने का इरादा अच्छा है लेकिन जब मई 2014 में इस सरकार ने सत्ता संभाली थी, तो राजकोषीय घाटा 4.5 प्रतिशत था जो 2018-19 में कम होकर 3.4 प्रतिशत पर आ गया लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर फिर से 4.8 प्रतिशत पर पहुंच गया जिससे साफ पता चला है कि सरकार अर्थव्यवस्था का सफलतापूर्वक प्रबंधन नहीं कर पा रही है। हर सरकार को संकट का सामना करना पड़ता है।”उन्होंने कहा कि काेरोना महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर दवाब बना था और यह पूरी दुनिया के साथ हुआ था। अब उसके बाद जब वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था बढ़ रही है तो घरेलू स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती आ गयी है। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी से जहां आम लोग और युवा परेशान है वहीं बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य के आवंटन को कम कर दिया गया है। देश में वेतन के ठहराव की स्थिति बन गयी है जिससे नौकरीपेशा लोग भी महंगाई से परेशान हो गये हैं।
उन्होंने कहा कि संरक्षणवाद से अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है। यह विश्व व्यापार के लिए सही नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रम्प द्वारा दो अप्रैल 2025 से भारतीय उत्पादों पर कर बढ़ाये जाने की घोषणा का उल्लेख करते हुये कहा कि बजट में अमेरिका के कई उत्पादों को ध्यान में रखकर टैरिफ कम किये जाने के बावजूद श्री ट्रम्प मानने को तैयार नहीं है।अब सरकार ने गूगल कर को कल हटाने की घोषणा की है तथा कुछ और उत्पादों पर शुल्क को कम करने की तैयारी कर रही है। इससे देश को आर्थिक नुकसान होगा जबकि अमेरिका में शुल्क बढ़ाये जाने से आयात भी प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि श्री ट्रम्प द्वारा शुल्क बढ़ाये जाने का कनाडा ने पुरजोर विरोध किया है जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अब तक एक शब्द नहीं बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार को श्री ट्रम्प की घोषणाओं से निपटने के उपायों से विपक्ष को भी अवगत कराना चाहिए क्योंकि टैरिफ युद्ध से व्यापार युद्ध शुरू हो जायेगा।भारतीय जनता पार्टी के आर पी एन सिंह ने कहा कि बजट का मतलब आम लोगों की जेब पैसा देना होता है जिससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ सके। सरकार का काम सिर्फ अपना खजाना भरना नहीं होता है। पांच साल तक विपक्ष सिर्फ एक ही चीज कहती रही है कि मध्यम वर्ग के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है लेकिन अब जब सरकार ने मध्यम वर्ग के लिए काम किया है तो कह रहा है कि यह कुछ नहीं है। बारह लाख 75 हजार रुपये की आय पर कोई कर नहीं लगेगा। मोदी सरकार के कार्यकाल में आने वाले दिनों में ऐसे ही निर्णय आते रहेंगे।भाजपा सदस्य ने कहा कि 10 वर्ष में संप्रग के कार्यकाल में तीन करोड़ नौकरियां मिली थी, लेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल में अब तक 18 करोड़ नौकरियां मिली है। संप्रग में 452 स्टार्ट अप थे, लेेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल में एक लाख से अधिक स्टार्टअप है और 17 लाख लोगों को इसमें राेजगार मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को किसानों के सबसे बड़े हितैषी बताते हुये कहा कि 3.46 लाख करोड़ रुपये 11 करोड़ किसानों को दिये गये हैं। छोटे और सीमांत किसानों को दिया गया है। श्री मोदी एक बटन दबाकर सीधे किसानों के खाते में धनारशि देते हैं। बजट में हमेशा किसानों की बात की गयी है।उन्होंने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का उल्लेख करते हुये कहा कि पहले देश में कई तरह के अप्रत्यक्ष कर भरने पड़ते थे और अभिभार लगाता था। आज जीएसटी एक स्वच्छ कर बनकर उभरा है और सभी राज्यों को अपनी हिस्सेदारी मिल रही है। कोविड के बाद भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है और विकसित भारत में विपक्ष को भी साथ मिलकर चलना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष ने बजट की कड़ी आलोचना करते हुये कहा कि पिछले दशक में आम लोगों की आय में वास्तव में कोई वृद्धि नहीं हुयी है। महंगाई चरम पर है। सब्जियों में कीमतों में तेजी का हवाला देते हुये उन्होंने कहा कि भारतीय कामगारों को दुनिया में सबसे कम मजदूरी मिलती है। अच्छे दिन कहां है। सरकार बेटी बढ़ाओ बेटी पढाओ की बात करती है, लेकिन सच्चाई यह है कि महिलाओं के लिए बजट को कमी की गयी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को नेशनल डिलिमिटेशन गठबंधन बताते हुये कहा कि केन्द्र सरकार भाजपा शासित और दूसरे दलों के शासित राज्यों के बीच भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि दो अप्रैल को सुनामी का आ रहा है क्योंकि श्री ट्रम्प नया कर लगाने जा रहें हैं। उन्होंने सरकार के स्लोगन ‘अच्छे दिन’ को जुमला बताते हुये कहा कि नोटबंदी असफल नीति थी। यह असफल सरकार है और यह जुमला सरकार है।
द्रमुक के एम मोहम्मद अब्दुला ने कहा कि इस सरकार की नीतियाें से महंगाई, बेरोजगारी बढ़ रही है। वित्तीय कुप्रबंधन के कारण देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है। एमएसएमई पेरशान हो रहा है। इनको वित्तीय सहायता की जरूरत है। मोदी सरकार के कारण राज्यों के समक्ष वित्तीय संकट पैदा हो रही है। अर्थव्यवस्था में सुस्ती आ रही है। नोटबंदी और जीएसटी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव हुआ है। सरकारी बैंक भी जोखिम में है। यह सरकार वित्तीय संघवाद को जानबूझकर नुकसान पहुंचा रही है। नौवे वित्त आयोग के तहत तमिलनाडु को केन्द्रीय राजस्व से 7.83 प्रतिशत हिस्सा मिलता था लेकिन 15वें वित्त आयोग में इसको कम कर लगभग आधा कर दिया गया है। भाजपा शासित राज्यों को अधिक राशि दी जा रही है।
आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने कहा कि जन्म से मृत्यु तक कर चुकाना पड़ता है। जनता को सभी सुविधाओं के लिए धन देना पड़ता है। सरकार को जनता संग्रहित किये गये कर का सदुपयोग करना चाहिए। जन्म से पूर्व लगने वाले टीकों पर जीएसटी चुकाना पड़ता है। जीवन के प्रत्येक चरण में व्यक्ति को कर देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कर से आम आदमी का जीवन कठिन हो रही है। इसका अर्थव्यवस्था पर बुरा असर हो रहा है। बाजार में मांग गिर रही है। सरकार को जीएसटी घटाना चाहिए। वाईएसआरसीपी के येर्रम वेंकट सुब्बा रेड्डी ने कहा कि वित्तीय मामलों में संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।
बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने कहा कि बजट लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला होना चाहिए। ओडिशा पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है। यह राज्य अक्सर प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित रहता है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए राज्य को अपने अनुसार नियोजन का अधिकार देना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदू शेखर राय ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व का बंटवारा तर्कसंगत होना चाहिए। राज्यों में कल्याणकारी काम हो रहे हैं और उन्हें भी राजस्व की आवश्यकता है। राष्ट्रीय जनता दल के ए. डी. सिंह ने कहा कि मध्यम आयवर्ग पर विशेष जोर देने की जरुरत है। भारतीय अर्थव्यवस्था को मांग बढाने पर बल देना होगा। अर्थनीति को जमीन से जोड़ना होगा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जाॅन ब्रिटास ने कहा कि केरल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से सीखने की जरूरत है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि समाज की आधारभूत आवश्यकताओं रोटी, कपड़ा और मकान का ध्यान में रखा जा रहा है। रोजगार अवसर उत्पन्न किये जा रहे हैं। गांव तक प्रगति पहुंच रही है। देशभर में बदलाव हाे रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के परस्पर कर के परिणाम बेहतर और भारत के हित होंगे। सरकार प्रयास कर रही है।




